खटीमा/देहरादून। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर नन्हे-मुन्ने बच्चों को दुलार किया और उनसे बातचीत कर उनके मन की बात जानी। उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर आत्मीयता से समय बिताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गोदभराई रस्म में प्रतिभाग कर गर्भवती महिलाओं को आशीर्वाद दिया तथा 10 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार सामग्री की किट वितरित की। उन्होंने 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट भी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने 05 नन्हे बच्चों का अपने हाथों से अन्नप्राशन संस्कार कराया। इस अवसर पर उन्होंने 09 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं 02 आशा कार्यकत्रियों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान समृद्धि एवं हरियाली के प्रतीक के रूप में पौधरोपण भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी वर्गों के कल्याण और राष्ट्रहित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। कर्मयोगी एवं साधक के रूप में उनका कार्य, समर्पण और सेवा भाव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम सेवा, स्नेह और संवाद को प्रत्येक व्यक्ति और हर घर तक पहुंचाने का माध्यम है। प्रदेशभर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य, संस्कार, प्रारंभिक शिक्षा और सर्वांगीण विकास की नींव तैयार करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की सराहना करते हुए कहा कि वे बच्चों की देखभाल और पोषण के साथ-साथ सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की सेवा और समर्पण समाज के लिए अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके स्वयं के बच्चे भी नगला तराई स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य एवं पोषण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महालक्ष्मी किट योजना, पोषण योजनाओं और मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना सहित अनेक योजनाओं के माध्यम से माताओं एवं बच्चों को आवश्यक सहायता एवं पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को हेली एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का विकल्परहित संकल्प है कि उत्तराखंड में कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे और प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित एवं संस्कारयुक्त वातावरण मिले।
स्वस्थ बचपन और सशक्त मातृशक्ति, सशक्त उत्तराखंड की मजबूत नींवः मुख्यमंत्री धामी
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