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Devbhumi Discover > उत्तराखण्ड > ब्रह्मोस वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल आठ साल बाद दोषमुक्त, देशद्रोह का कलंक मिटा
उत्तराखण्ड

ब्रह्मोस वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल आठ साल बाद दोषमुक्त, देशद्रोह का कलंक मिटा

Devbhumi Discover
Last updated: December 7, 2025 1:52 pm
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3 Min Read
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रुड़की।

रुड़की (उत्तराखंड) के 27 वर्षीय युवा और ब्रह्मोस एयरोस्पेस नागपुर में वैज्ञानिक रहे निशांत अग्रवाल को आठ साल पुराने जासूसी और तकनीक लीक के मामले में अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। इसी के साथ उनके माथे पर लगा देशद्रोह का कलंक भी पूरी तरह मिट गया है। गिरफ्तारी के समय वह अपने साथियों के साथ ब्रह्मोस मिसाइल तकनीक पर काम कर रहे थे और कुछ ही दिन पहले डीआरडीओ ने उन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड दिया था।

8 अक्तूबर 2018 की सुबह उनके परिवार पर किसी काली रात की तरह टूटी। यूपी और महाराष्ट्र एटीएस ने तड़के साढ़े चार बजे उनके घर पहुंचकर तलाशी ली, लैपटॉप और मोबाइल कब्जे में लिए और पाकिस्तान को ब्रह्मोस की तकनीक लीक करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से महज साढ़े पाँच माह पहले ही उनका विवाह हुआ था। पत्नी और मां के लिए यह समय अघोषित जेल जैसा रहा, जो पूरे आठ साल तक चला।

निशांत अग्रवाल की पत्नी क्षितिजा अग्रवाल, जो इस समय रुड़की नेहरू नगर स्थित ससुराल में अपनी सास रितु अग्रवाल के साथ रह रही हैं, बताती हैं कि निशांत ने 2013 में नागपुर स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस में बतौर वैज्ञानिक ज्वाइन किया था। गिरफ्तारी से ठीक कुछ समय पहले उन्हें दिल्ली में DRDO का Young Scientist Award मिला था। लेकिन 8 अक्तूबर की सुबह एटीएस अचानक घर पहुंची और बिना कुछ समझाए निशांत को हिरासत में ले गई।

लगभग नौ महीने बाद नागपुर सेशन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई। इसके बाद छह साल तक बेहद कठिन समय बीता। तीन जून 2024 को सेशन कोर्ट ने उम्मीद के विपरीत निशांत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिससे परिजन पूरी तरह टूट गए। परिवार को भरोसा था कि फोरेंसिक जांच में भी तकनीक लीक करने का कोई सबूत नहीं मिला है।

हताश न होकर परिवार ने हिम्मत जुटाई और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अंततः सच की जीत हुई और मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने निशांत को बरी कर दिया। अदालत में यह भी साबित नहीं हुआ कि किसी भी तरह का डाटा उनके लैपटॉप से ट्रांसफर हुआ था। ट्रेनिंग के दौरान का कुछ यूजलेस टेक्निकल मैटेरियल उनके सिस्टम में मिला था, जिसे आधार बनाकर आरोप लगाए गए थे।

निशांत की मां ऋतु अग्रवाल भावुक होकर कहती हैं—“बेटे को सजा मिलने के बाद सांस तो ले रही थी, लेकिन जिंदा नहीं थी। बस यही भरोसा था कि एक दिन मेरा बेटा जरूर घर आएगा।”

आठ साल बाद यह भरोसा आखिरकार सच साबित हुआ और परिवार में फिर खुशियां लौट आईं।

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TAGGED:after eight yearsBrahMos scientistNishant Agarwal acquittedtreason charges cleared
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