देहरादून। उत्तराखंड विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की साइबर टीम ने निवेश के नाम पर 69.90 लाख रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले का खुलासा करते हुए गौतमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। पुलिस ने उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त आईफोन-13 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, आधार कार्ड और कोटक बैंक का खाली चेक बरामद किया है। मामले में आरोपी के अन्य साथियों और साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के संबंध में पूछताछ जारी है।
साइबर अपराध थाना देहरादून में शिकायतकर्ता हनी सिंह पत्नी संदीप, निवासी देहरादून ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात व्यक्तियों ने निवेश के नाम पर उनके साथ 69 लाख 90 हजार रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की है। शिकायत के अनुसार फेसबुक पर एक निवेश विज्ञापन के माध्यम से उनसे संपर्क किया गया और बाद में उन्हें एक व्हाट्सऐप समूह में जोड़ दिया गया। आरोपियों ने अधिक लाभ का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई।
शिकायत के आधार पर साइबर अपराध थाना देहरादून में मुकदमा अपराध संख्या 23/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के निर्देश पर निरीक्षक के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच से मिला सुराग
विवेचना के दौरान साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि कोटक बैंक के एक खाते में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित 10 लाख रुपये की रकम पहुंची थी। बैंक खाते और उससे जुड़े मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को आरोपी के गौतमबुद्धनगर में होने की जानकारी मिली।
पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी की तलाश की। जांच में पता चला कि आरोपी अपने मूल पते पर नहीं रह रहा था, बल्कि परिवार के साथ ग्रेटर नोएडा के ओमीक्रॉन-1 स्थित एचआईजी अपार्टमेंट में रह रहा था। पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर मुनिन्द्र भाटी पुत्र रविन्द्र भाटी, मूल निवासी ग्राम रौनी अस्तौली, नोएडा, उत्तर प्रदेश और हाल निवासी एचआईजी अपार्टमेंट, ओमीक्रॉन-1, ग्रेटर नोएडा को गिरफ्तार कर लिया।
निवेश के नाम पर ठगी का तरीका
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को निवेश के नाम पर अधिक लाभ का लालच देकर ठगी की जा रही थी। ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। इसी क्रम में आरोपी मुनिन्द्र भाटी के कोटक बैंक खाते में 10 लाख रुपये पहुंचे थे।
पूछताछ में आरोपी इस रकम के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सका। साथ ही मामले में शामिल अन्य लोगों के संबंध में भी जानकारी छिपाने का प्रयास किया गया। आरोपी के मोबाइल फोन और बैंक खाते से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस को उसके अन्य साथियों तथा साइबर ठगी के नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

