By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Devbhumi DiscoverDevbhumi DiscoverDevbhumi Discover
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • क्राइम
  • खेल
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • पर्यटन
  • E-Paper
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
Search
Recent Posts
  • DM ने दिए निर्देश, PM दौरे को लेकर प्रशासन अलर्ट
  • निष्कासितों पर सियासत, BJP ने जताई जीत की हैट्रिक की उम्मीद
  • अवैध कसीनो पर छापा, 10 डांसर समेत 35 गिरफ्तार
  • हवालात में PRD जवान की मौत, थानाध्यक्ष समेत 4 पर कार्रवाई
  • सीएम धामी ने सुना ‘मन की बात’ का 132वां एपिसोड, जनप्रतिनिधियों संग साझा किए विचार
  • Advertise
© 2023 Devbhumi Discover. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
Devbhumi DiscoverDevbhumi Discover
Font ResizerAa
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • क्राइम
  • खेल
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • पर्यटन
  • E-Paper
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
Search
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • क्राइम
  • खेल
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • पर्यटन
  • E-Paper
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
Follow US
  • Advertise
© 2023 Devbhumi Discover. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Devbhumi Discover > उत्तराखण्ड > हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति
उत्तराखण्ड

हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति

Devbhumi Discover
Last updated: December 2, 2025 8:48 AM
Devbhumi Discover
Share
6 Min Read
SHARE
  • हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति
  • संस्कृत उत्थान के लिए उच्च स्तरीय आयोग के गठन की घोषणा
  • दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विद्वानों द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन
  • उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु कई छात्रवृत्ति व प्रोत्साहन योजनाएँ संचालित
  • प्रदेश के प्रत्येक जनपद में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित करने की पहल
  • नई शिक्षा नीति के माध्यम से संस्कृत को व्यवहारिक और आधुनिक भाषा के रूप में सशक्त बनाने का प्रयास

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी आज हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान एवं विकास हेतु एक उच्च स्तरीय आयोग के गठन की घोषणा की।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विद्वानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “भारतीय ज्ञान परंपरा- वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित यह सम्मेलन भारतीय सभ्यता की गौरवमयी जड़ों को विश्व पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विद्वानों द्वारा संस्कृत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा, जो एक प्रेरणादायी पहल है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके लिए संस्कृत भाषा हमेशा से प्रेरणा का विषय रही है। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा के दौरान कक्षा 9 तक संस्कृत का अध्ययन किया और उस दौरान सीखे गए श्लोक, व्याकरण एवं भाषा की मधुरता आज भी स्मरण में है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और विज्ञान का आधार है, जिसने प्राचीन मानव सभ्यताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि विश्व की अनेकों भाषाओं की जड़ें संस्कृत से जुड़ी हुई हैं। वेद, पुराण, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, दर्शन, गणित, साहित्य, विज्ञान और खगोलशास्त्र जैसे सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में रचे गए, जिसने भारत की वैचारिक धरोहर को समृद्ध किया।
मुख्यमंत्री ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोपीय विद्वानों द्वारा संस्कृत साहित्य में बढ़ती रुचि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने संस्कृत आधारित ज्ञान को विश्व में प्रसारित किया, जहाँ से चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, चाणक्य, ब्रह्मगुप्त और पाणिनि जैसे महान विद्वानों ने जन्म लिया। संस्कृत केवल विज्ञान की भाषा नहीं, बल्कि नीति, मानवीय मूल्यों और वैश्विक बंधुत्व का संदेश देने वाली भाषा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु कई सार्थक प्रयास जारी हैं। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया है। ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्स, ऑनलाइन साहित्य उपलब्धता जैसी पहलों से संस्कृत को नई पीढ़ी तक सरल रूप में पहुंचाया जा रहा है। कर्नाटक के मट्टूर गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत आज भी दैनिक जीवन की भाषा बन सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लोकसभा की कार्यवाही के संस्कृत अनुवाद की पहल भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत का केंद्र रहा है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करना इसी विरासत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि गार्गी   संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को प्रति माह 251 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। डॉ. भीमराव अंबेडकर एससी/एसटी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत संस्कृत विषय के एससी/एसटी विद्यार्थियों को समान आर्थिक सहायता दी जा रही है। संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना के तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 5100, 4100 और 3100 रुपए की पुरस्कार राशि दी जा रही है। इसके साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और श्री रघुनाथकीर्ति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशालाएँ एवं छात्र प्रतियोगिताओं जैसे विभिन्न कार्यक्रमों का लगातार आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जनपद में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित करने का संकल्प लिया है, जिससे देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास और मजबूत होंगे। साथ ही संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि, जिसने वेदों और ऋषि-मुनियों के ज्ञान को जन्म दिया, वहाँ संस्कृत को समृद्ध करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक दिन संस्कृत केवल पूजा-पाठ की भाषा न रहकर आम बोलचाल की भाषा के रूप में भी स्थापित होगी।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल, विधायक  आदेश चौहान,  प्रदीप बत्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, विदेश सचिव (भारत सरकार) मीना मल्होत्रा, सचिव संस्कृत उत्तराखंड दीपक गैरोला, संस्कृत विश्वविद्यालय कुलपति दिनेश चंद्र शास्त्री, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोभाल सहित विभिन्न देशों से आए वक्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

You Might Also Like

DM ने दिए निर्देश, PM दौरे को लेकर प्रशासन अलर्ट

निष्कासितों पर सियासत, BJP ने जताई जीत की हैट्रिक की उम्मीद

अवैध कसीनो पर छापा, 10 डांसर समेत 35 गिरफ्तार

हवालात में PRD जवान की मौत, थानाध्यक्ष समेत 4 पर कार्रवाई

सीएम धामी ने सुना ‘मन की बात’ का 132वां एपिसोड, जनप्रतिनिधियों संग साझा किए विचार

TAGGED:Chief MinisterDhami's presence at the Internationalin HaridwarSanskrit Conference held
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article शारदा करिडोर, इको-टूरिज्म व आधारभूत ढांचों की समीक्षा हेतु मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण
Next Article मुख्य सचिव ने चम्पावत के खेल प्रतिभाओं को किया सम्मानित, बूम में किया वृक्षारोपण
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

100FollowersLike
100FollowersFollow
100FollowersFollow
100SubscribersSubscribe
4.4kFollowersFollow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

देहरादून में ‘भारत: विश्व गुरु की राह पर’ विचार गोष्ठी आयोजित
उत्तराखण्ड March 29, 2026
कुम्भ 2027 बनेगा ‘डिजिटल कुम्भ’, AI और IoT तकनीक से होगा स्मार्ट प्रबंधन
उत्तराखण्ड राज्य समाचार March 29, 2026
चारधाम यात्रा से पहले मांग-आपूर्ति संतुलन, कालाबाजारी पर सख्ती और ग्रीन एनर्जी पर जोर
उत्तराखण्ड March 29, 2026
एसएसपी डोबाल का सख्त एक्शन, इंस्पेक्टर से लेकर एसआई तक के तबादले
उत्तराखण्ड March 28, 2026
Devbhumi DiscoverDevbhumi Discover
Follow US
© 2023 Devbhumi Discover. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?