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Devbhumi Discover > उत्तराखण्ड > यूएसडीएमए की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए श्रीलंका के अधिकारी
उत्तराखण्ड

यूएसडीएमए की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए श्रीलंका के अधिकारी

Devbhumi Discover
Last updated: March 17, 2026 12:44 pm
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6 Min Read
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  • यूएसडीएमए की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए श्रीलंका के अधिकारी
  • नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के तत्वावधान में श्रीलंका के 40 सिविल सेवा अधिकारी पहुंचे एसईओसी

नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के तत्वावधान में श्रीलंका के 40 सिविल सेवा के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों, व्यवस्थाओं एवं नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी  राजकुमार नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को यूएसडीएमए द्वारा किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आपदा की स्थिति में किस प्रकार त्वरित राहत एवं बचाव कार्य धरातल पर संचालित किए जाते हैं। साथ ही राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की भूमिका, चेतावनी प्रसारण प्रणाली, अलर्ट जारी करने की प्रक्रिया तथा तकनीक के प्रभावी उपयोग के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया गया कि उत्तराखण्ड  में किस प्रकार आपदा जोखिम न्यूनीकरण में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है तथा सूचना का आदान-प्रदान अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक प्रभावी रूप से किस प्रकार किया जाता है। इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम की अवधारणा एवं संरचना, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। यूएसडीएमए तथा एनडीएमए किस प्रकार समन्वय करते हैं, इसके बारे में भी बताया गया।
इस अवसर पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने मौसम पूर्वानुमान एवं बहु-स्तरीय चेतावनी प्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि आईएमडी द्वारा मौसम संबंधी आंकड़े अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं, जिनमें उपग्रह आधारित अवलोकन प्रणाली, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र, स्वचालित वर्षामापी यंत्र, मौसम पूर्वानुमान मॉडल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का रियल-टाइम एकीकरण कर उच्च स्तरीय विश्लेषण किया जाता है, जिसके आधार पर विभिन्न स्तर के पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय राज्यों में लोकेशन-स्पेसिफिक पूर्वानुमानों के महत्व पर प्रकाश डाला, जहां मौसम की परिस्थितियां अत्यधिक परिवर्तनशील होती हैं।
वहीं यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में राज्य द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक एवं संस्थागत प्रयासों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में भूस्खलन एक प्रमुख आपदा है, जिसके प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान हेतु विस्तृत भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण एवं जोखिम क्षेत्र निर्धारण किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों, जैसे रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम, ड्रोन सर्वेक्षण, लिडार तकनीक एवं रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही चयनित स्थलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, जो वर्षा, मिट्टी की नमी एवं ढलान की गति जैसे मापदंडों के आधार पर भूस्खलन की संभावना का पूर्व संकेत प्रदान करते हैं।
चूंकि श्रीलंका भी भूस्खलन एवं अत्यधिक वर्षा से उत्पन्न आपदाओं का सामना करता है, इसलिए वहां से आए प्रतिनिधियों ने इन विषयों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने उत्तराखण्ड में अपनाए जा रहे तकनीकी मॉडल, अर्ली वार्निंग सिस्टम, जोखिम आकलन पद्धतियों एवं सामुदायिक आधारित दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा इसे अपने देश में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ. पीडी माथुर, डाॅ. पूजा राणा आदि मौजूद रहे।

साझा दृष्टिकोण विकसित करने के लिए उपयोगी-सुमन
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संवाद एवं अध्ययन भ्रमण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये विभिन्न देशों के बीच ज्ञान, अनुभव एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बनते हैं। उत्तराखण्ड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य में विकसित की गई व्यवस्थाएं एवं तकनीकी पहलें अन्य देशों के लिए उपयोगी हो सकती हैं, वहीं हमें भी वैश्विक अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है। ऐसे इंटरैक्शन से न केवल संस्थागत क्षमता सुदृढ़ होती है, बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक समन्वित एवं साझा दृष्टिकोण विकसित होता है, जो अंततः जन-जीवन की सुरक्षा एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाता है।

एनसीजीजी प्रशिक्षण के क्षेत्र में निभा रहा अहम भूमिका-सिंह
एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ एपी सिंह ने बताया कि नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में स्थापित एक प्रमुख संस्थान है, जो सुशासन, नीतिगत सुधार, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में कार्य करता है। यह संस्थान न केवल भारत के सिविल सेवकों, बल्कि विभिन्न देशों के अधिकारियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। एनसीजीजी ने अब तक 52 देशों के सिविल सेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए हैं और 5500 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। श्रीलंका सरकार के साथ हुए समझौते के अंतर्गत एनसीजीजी द्वारा श्रीलंकाई सिविल सेवकों के लिए आपदा प्रबंधन विषय पर विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत यह अध्ययन भ्रमण आयोजित किया गया।

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