देहरादून।
राजधानी देहरादून की एक प्रमुख ज्वेलरी फर्म पर राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने छापा मारकर 15 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का भंडाफोड़ किया। जांच में यह खुलासा हुआ कि फर्म ग्राहकों को नकद बिक्री कर रही थी, लेकिन उसे घोषित करने के बजाय माल की आपूर्ति अपने ही दूसरे प्रतिष्ठान को दर्शाया जा रहा था। सुरक्षा कारणों से ज्वेलरी की आपूर्ति के लिए ई-वे बिल बनाने की बाध्यता नहीं होती, जिसका फायदा उठाकर फर्म लंबे समय से कर चोरी कर रही थी।
आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देश पर सीआईयू ने ज्वेलरी फर्म की जीएसटी रिटर्न और अन्य आंकड़ों की गहन जांच की। जांच में सामने आया कि एक ही स्थान से दो प्रतिष्ठान संचालित हो रहे थे और दोनों के डायरेक्टर समान थे। बिक्री ग्राहकों को नकद में की जा रही थी, लेकिन रिकॉर्ड में उस माल की आपूर्ति फर्जी रूप से दूसरी फर्मों को दर्शाई गई थी। यही नहीं, फर्जी आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ भी लिया जा रहा था और माल की वापसी को दर्ज नहीं किया जा रहा था।
गड़बड़ी की पुष्टि होने पर विभाग की 15 अधिकारियों की टीम ने प्रतिष्ठान पर छापा मारा। मौके पर आय-व्यय के बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड कब्जे में लिए गए, साथ ही फोरेंसिक टीम की मदद से डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए। जांच में पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद फर्म संचालक ने तत्काल प्रभाव से 45 लाख रुपये जमा करा दिए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और कर चोरी की कुल राशि और भी अधिक निकल सकती है।
कैश में बिक्री का असल सच अब आएगा सामने
राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ज्वेलरी प्रतिष्ठान में बड़े पैमाने पर आभूषण नकद में बेचे जा रहे थे, जिन्हें घोषित नहीं किया गया। कब्जे में लिए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होगा कि दोनों ज्वेलरी प्रतिष्ठानों ने वास्तव में कितनी राशि की कर चोरी की है। विभाग ने कहा कि वसूली कर के साथ-साथ अर्थदंड और ब्याज सहित की जाएगी।